Rajan tiwari

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हवा के पर कतरना चाहिए था


1222-1222-122

यकीं थोड़ा तो करना चाहिए था,
तुम्हें दो पल ठहरना चाहिए था//1

ये दिल है, काँच का टुकड़ा नहीं है,
जो टूटे तो बिखरना चाहिए था//2

कहाँ ये इश्क़ है बस का तुम्हारे,
तुम्हें कुछ और करना चाहिए था//3

मिली है हुस्न की दौलत ख़ुदा से,
ज़रा सजना संवरना चाहिए था//4

छुपा है दर्द जो दिल में तुम्हारे,
जुबाँ पर भी उतरना चाहिए था//5

उड़ाकर ले गई आँचल तुम्हारा,
हवा के पर कतरना चाहिए था//6

बहुत बेरंग हैं बच्चों के चेहरे,
बसन्ती रंग भरना चाहिए था//7

सियासत में अभी कच्चे हो 'राजन',
जुबाँ देकर मुकरना चाहिए था//8

               
                ✍️
     राजन तिवारी 'राजन'
           इंदौर (म.प्र.)
        7898897777

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